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mahabharat 8.68.27-28h: यदि आज युद्धभूमि में विचरण करने वाले इस महाभयंकर योद्धा राधापुत्र कर्ण का सामना करने की शक्ति तुममें नहीं है, तो इस गाण्डीव धनुष को किसी अन्य राजा को दे दो, जो शस्त्र विद्या में तुमसे श्रेष्ठ हो॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  8.68.27-28h 
राधेयमेतं यदि नाद्य शक्त-
श्चरन्तमुग्रं प्रतिबाधनाय॥ २७॥
प्रयच्छान्यस्मै गाण्डिवमेतदद्य
त्वत्तो योऽस्त्रैरभ्यधिको वा नरेन्द्र:।
 
 
अनुवाद
यदि आज युद्धभूमि में विचरण करने वाले इस महाभयंकर योद्धा राधापुत्र कर्ण का सामना करने की शक्ति तुममें नहीं है, तो इस गाण्डीव धनुष को किसी अन्य राजा को दे दो, जो शस्त्र विद्या में तुमसे श्रेष्ठ हो॥27 1/2॥
 
If you do not have the strength to face this fearsome warrior, Radha's son Karna, roaming the battlefield today, then give this Gandiva bow to some other king who is superior to you in weapon prowess.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)