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mahabharat 8.68.26-27h: तुम अपना गाण्डीव धनुष भगवान श्रीकृष्ण को दे दो और युद्धभूमि में उनके सारथी बन जाओ। फिर जैसे इन्द्र ने हाथ में वज्र लेकर वृत्रासुर का वध किया था, वैसे ही श्रीकृष्ण महाबली कर्ण का वध करेंगे॥ 26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  8.68.26-27h 
धनुश्च तत् केशवाय प्रयच्छ
यन्ता भविष्यस्त्वं रणे केशवस्य॥ २६॥
तदाहनिष्यत् केशव: कर्णमुग्रं
मरुत्पतिर्वृत्रमिवात्तवज्र:।
 
 
अनुवाद
तुम अपना गाण्डीव धनुष भगवान श्रीकृष्ण को दे दो और युद्धभूमि में उनके सारथी बन जाओ। फिर जैसे इन्द्र ने हाथ में वज्र लेकर वृत्रासुर का वध किया था, वैसे ही श्रीकृष्ण महाबली कर्ण का वध करेंगे॥ 26 1/2॥
 
Give your Gandiva bow to Lord Krishna and become his charioteer on the battlefield. Then just as Indra killed Vritraasura with the thunderbolt in his hand, in the same way Krishna will kill the fierce warrior Karna.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)