Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.68.25-26h: कुन्तीपुत्र! तुम्हारा रथ स्वयं विश्वकर्मा ने बनाया है, उसके धुरे ध्वनि नहीं करते। उस पर वानर ध्वज फहराता है। ऐसे शुभ रथ पर आसीन होकर, सुवर्णजटित तलवार, चार हाथों में श्रेष्ठ गाण्डीव धनुष तथा भगवान श्रीकृष्ण जैसे सारथि द्वारा चलाए जाने पर भी तुम कर्ण के भय से कैसे भाग गए?॥ 25 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीपुत्र! तुम्हारा रथ स्वयं विश्वकर्मा ने बनाया है, उसके धुरे ध्वनि नहीं करते। उस पर वानर ध्वज फहराता है। ऐसे शुभ रथ पर आसीन होकर, सुवर्णजटित तलवार, चार हाथों में श्रेष्ठ गाण्डीव धनुष तथा भगवान श्रीकृष्ण जैसे सारथि द्वारा चलाए जाने पर भी तुम कर्ण के भय से कैसे भाग गए?॥ 25 1/2॥
‘Kunti's son! Your chariot has been built by Vishwakarma himself, its axles do not make any sound. The monkey flag flutters on it. Despite being seated on such an auspicious chariot, carrying a golden-studded sword, the best bow in four hands, Gandiva, and being driven by a charioteer like Lord Krishna, how did you run away in fear of Karna?॥ 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥