Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.68.24: जो संकट में पड़े हुए मनुष्य को बचाता है, वही मित्र और प्रेममय मित्र है। प्राचीन ऋषिगण ऐसा कहते हैं। यही वह धर्म है जिसका पालन सत्पुरुषों ने सदैव किया है॥24॥ | mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपद्गतं कश्चन यो विमोक्षेत्
स बान्धव: स्नेहयुक्त: सुहृच्च।
एवं पुराणा मुनयो वदन्ति
धर्म: सदा सद्भिरनुष्ठितश्च॥ २४॥
अनुवाद
जो संकट में पड़े हुए मनुष्य को बचाता है, वही मित्र और प्रेममय मित्र है। प्राचीन ऋषिगण ऐसा कहते हैं। यही वह धर्म है जिसका पालन सत्पुरुषों ने सदैव किया है॥24॥
The person who rescues a person in trouble is a friend and a loving friend. The ancient sages say so. This is the religion that has always been followed by good men.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥