Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.68.22-23: निश्चय ही इस युद्ध में मेरे दुर्भाग्य और पूर्वजन्म के पाप प्रबल हैं। दुष्ट कर्ण ने युद्ध में तुम्हें तिनके के समान समझकर मेरा अपमान किया है। कर्ण ने मेरे साथ वैसा ही व्यवहार किया है जैसा किसी शक्तिहीन, बंधु-बांधवों से रहित असहाय व्यक्ति के साथ किया जाता है॥ 22-23॥ | mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मम ह्यभाग्यानि पुरा कृतानि
पापानि नूनं बलवन्ति युद्धे॥ २२॥
तृणं च कृत्वा समरे भवन्तं
ततोऽहमेवं निकृतो दुरात्मना।
वैकर्तनेनैव तथा कृतोऽहं
यथा ह्यशक्त: क्रियते ह्यबान्धव:॥ २३॥
अनुवाद
निश्चय ही इस युद्ध में मेरे दुर्भाग्य और पूर्वजन्म के पाप प्रबल हैं। दुष्ट कर्ण ने युद्ध में तुम्हें तिनके के समान समझकर मेरा अपमान किया है। कर्ण ने मेरे साथ वैसा ही व्यवहार किया है जैसा किसी शक्तिहीन, बंधु-बांधवों से रहित असहाय व्यक्ति के साथ किया जाता है॥ 22-23॥
Certainly my misfortunes and past sins are prevailing in this war. The evil-minded Karna has insulted me in the war by treating you like a straw. Karna has treated me in the same way as a helpless person who is powerless and devoid of friends and relatives is treated.॥ 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥