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mahabharat 8.68.19-20h: आज जब ऐसी स्थिति है, तो इस युद्ध में, जो सारथिपुत्र कर्ण, राजा दुर्योधन और अन्य सभी लोग मुझसे युद्ध करने की इच्छा से यहाँ एकत्र हुए हैं, मैं क्या कर सकता हूँ?॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  8.68.19-20h 
एवं गते किंच मयाद्य शक्यं
कार्यं कर्तुं विग्रहे सूतजस्य॥ १९॥
तथैव राज्ञश्च सुयोधनस्य
ये वापि मां योद्धुकामा: समेता:।
 
 
अनुवाद
आज जब ऐसी स्थिति है, तो इस युद्ध में, जो सारथिपुत्र कर्ण, राजा दुर्योधन और अन्य सभी लोग मुझसे युद्ध करने की इच्छा से यहाँ एकत्र हुए हैं, मैं क्या कर सकता हूँ?॥19 1/2॥
 
Today, when such is the situation, what can I do in this war between the son of a charioteer, Karna, King Duryodhana and all the others who have gathered here with the desire to fight with me?॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)