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mahabharat 8.68.15: आकाशवाणी ने शतश्रृंग पर्वत के शिखर पर तपस्वी मुनियों से ये बातें कही थीं; परंतु उनका कथन सफल नहीं हुआ। निश्चय ही देवता भी झूठ बोलते हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.68.15 
इत्यन्तरिक्षे शतशृङ्गमूर्ध्नि
तपस्विनां शृण्वतां वागुवाच।
एवंविधं तच्च नाभूत् तथा च
देवापि नूनमनृतं वदन्ति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आकाशवाणी ने शतश्रृंग पर्वत के शिखर पर तपस्वी मुनियों से ये बातें कही थीं; परंतु उनका कथन सफल नहीं हुआ। निश्चय ही देवता भी झूठ बोलते हैं॥15॥
 
‘The voice from the sky had said these things to the ascetic saints on the peak of Shatashringa mountain; but its statement was not successful. Certainly even the gods tell lies.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)