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mahabharat 8.68.12: उससे श्रेष्ठ कोई धनुर्धर नहीं होगा। कोई भी प्राणी उसे कभी पराजित नहीं कर सकेगा। वह अपने मन और इन्द्रियों को वश में करके समस्त विद्याओं को प्राप्त कर लेगा और इच्छानुसार समस्त प्राणियों को वश में कर सकेगा।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.68.12 
अस्मात् परो नो भविता धनुर्धरो
नैनं भूतं किंचन जातु जेता।
इच्छन्नयं सर्वभूतानि कुर्याद्
वशे वशी सर्वसमाप्तविद्य:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उससे श्रेष्ठ कोई धनुर्धर नहीं होगा। कोई भी प्राणी उसे कभी पराजित नहीं कर सकेगा। वह अपने मन और इन्द्रियों को वश में करके समस्त विद्याओं को प्राप्त कर लेगा और इच्छानुसार समस्त प्राणियों को वश में कर सकेगा।॥12॥
 
‘There will be no other archer better than him. No creature will ever be able to defeat him. By controlling his mind and senses, he will acquire all the knowledge and will be able to subjugate all creatures at will.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)