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mahabharat 8.67.7: तत्पश्चात् जिस प्रकार वर्षा ऋतु में काले बादल जल बरसाते हैं, उसी प्रकार उन्होंने अपनी विद्या, शस्त्र, बल और पुरुषार्थ द्वारा धनुष को उसकी नोक तक चढ़ाकर बहुत से बाण चलाये।   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.67.7 
ततोऽपरान् बाणसंघाननेका-
नाकर्णपूर्णायतविप्रमुक्तान्।
ससर्ज शिक्षास्त्रबलप्रयत्नै-
स्तथा यथा प्रावृषि कालमेघ:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जिस प्रकार वर्षा ऋतु में काले बादल जल बरसाते हैं, उसी प्रकार उन्होंने अपनी विद्या, शस्त्र, बल और पुरुषार्थ द्वारा धनुष को उसकी नोक तक चढ़ाकर बहुत से बाण चलाये।
 
Thereafter, just as the dark clouds pour down water during the rainy season, in the same way, by means of his education, weapons, strength and efforts, he shot a large number of arrows, stretching his bow till its tip.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)