Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.67.4: नरेन्द्र! जैसे राज हाथी सिंह की ओर झपटता है, वैसे ही अश्वत्थामा ने मुझे सामने पाकर विजय हेतु मुझ पर आक्रमण किया। महाराज! वह मारा जाता हुआ भी कौरवों की रक्षा करना चाहता था।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.67.4 
स मां समासाद्य नरेन्द्र यत्त:
समभ्ययात् सिंहमिव द्विपेन्द्र:।
अकार्षीच्च रथिनामुज्जिहीर्षां
महाराज वध्यतां कौरवाणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! जैसे राज हाथी सिंह की ओर झपटता है, वैसे ही अश्वत्थामा ने मुझे सामने पाकर विजय हेतु मुझ पर आक्रमण किया। महाराज! वह मारा जाता हुआ भी कौरवों की रक्षा करना चाहता था।॥4॥
 
Narendra! Just as a king elephant rushes towards a lion, similarly Ashwatthama found me in front of him and attacked me striving for victory. Maharaj! He desired to save the Kauravarathas while being killed. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)