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mahabharat 8.67.3: हे राजन! मेरे रथ को मेघ के समान गर्जना करते देख सारी कौरव सेना युद्ध की व्यूह रचना करके खड़ी हो गई। फिर उस सेना के पाँच सौ वीर योद्धाओं का वध करके मैंने आचार्यपुत्र पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.67.3 
दृष्ट्वा रथं मेघरवं ममैव
समस्तसेना च रणेऽभ्यतिष्ठत्।
तेषामहं पञ्च शतानि हत्वा
ततो द्रौणिमगमं पार्थिवाग्रॺ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मेरे रथ को मेघ के समान गर्जना करते देख सारी कौरव सेना युद्ध की व्यूह रचना करके खड़ी हो गई। फिर उस सेना के पाँच सौ वीर योद्धाओं का वध करके मैंने आचार्यपुत्र पर आक्रमण किया।
 
O great king! On seeing my chariot making a deep rumbling sound like that of a cloud, the entire Kaurava army stood up in battle formation. Then, after killing five hundred brave warriors from that army, I attacked the son of the Acharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)