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श्लोक 8.67.22-23  |
आमन्त्रये त्वां ब्रूहि जयं रणे मे
पुरा भीमं धार्तराष्ट्रा ग्रसन्ते॥ २२॥
सौतिं हनिष्यामि नरेन्द्रसिंह
सैन्यं तथा शत्रुगणांश्च सर्वान्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| मैं आपकी अनुमति चाहता हूँ। कृपया मुझे युद्धभूमि में विजय का आशीर्वाद दें। हे नरेन्द्रसिंह! धृतराष्ट्र के पुत्र भीमसेन को ग्रास बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं। उससे पहले मैं सारथिपुत्र कर्ण, उसकी सेना तथा समस्त शत्रुओं का वध कर दूँगा। 22-23. |
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| I seek your permission. Please bless me with victory on the battlefield. O Narendrasingh! Dhritarashtra's sons are trying to engulf Bhimasena. Before that I will kill charioteer's son Karna, his army and all the enemies. 22-23. |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अर्जुनवाक्ये सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥
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