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mahabharat 8.67.2: हे राजन! आज जब मैं संशप्तकों के साथ युद्ध कर रहा था, तब कौरव सेना का नायक द्रोणपुत्र अश्वत्थामा विषधर सर्प के समान बाण चलाता हुआ अचानक मेरे सामने आकर खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.67.2 
अर्जुन उवाच
संशप्तकैर्युध्यमानस्य मेऽद्य
सेनाग्रयायी कुरुसैन्येषु राजन्।
आशीविषाभान् खगमान् प्रमुञ्चन्
द्रौणि: पुरस्तात् सहसाभ्यतिष्ठत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आज जब मैं संशप्तकों के साथ युद्ध कर रहा था, तब कौरव सेना का नायक द्रोणपुत्र अश्वत्थामा विषधर सर्प के समान बाण चलाता हुआ अचानक मेरे सामने आकर खड़ा हो गया।
 
O King! Today when I was fighting with the Samshaptakas, the leader of the Kaurava army, Drona's son Ashwatthama, suddenly came and stood in front of me, shooting arrows like a poisonous serpent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)