Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.67.18-19: महानुभाव! भरतवंशी नृपश्रेष्ठ! यदि मैं आज इस युद्ध में शत्रु सेना में उपस्थित महारथियों में शूतपुत्र वीर दुर्जय के साथ इन्हें देख लूँ, तो मैं इनके साथ रणभूमि में जाकर उसी प्रकार युद्ध करूँगा, जैसे वज्रधारी इन्द्र ने वृत्रासुर के साथ किया था ॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महानुभाव! भरतवंशी नृपश्रेष्ठ! यदि मैं आज इस युद्ध में शत्रु सेना में उपस्थित महारथियों में शूतपुत्र वीर दुर्जय के साथ इन्हें देख लूँ, तो मैं इनके साथ रणभूमि में जाकर उसी प्रकार युद्ध करूँगा, जैसे वज्रधारी इन्द्र ने वृत्रासुर के साथ किया था ॥18-19॥
Excellency! Bharatvanshi Nripashrestha! If I see him today in this battle, along with the brave Durjay, the son of Suta, among the charioteers present in the enemy army, then I will join him in the battlefield and fight in the same way as Indra wielding the thunderbolt did with Vritrasura. 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥