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mahabharat 8.67.17-18h: हे राजन, शिनि के पोते सात्यकि और धृष्टद्युम्न को मेरे चक्र-रक्षक बनने दो; युधामन्यु तथा उत्तमौजा, ये दो वीर राजकुमार मेरे पृष्ठ भाग की रक्षा करें॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  8.67.17-18h 
शैनेयो मे सात्यकिश्चक्ररक्षौ
धृष्टद्युम्नश्चापि तथैव राजन्॥ १७॥
युधामन्युश्चोत्तमौजाश्च शूरौ
पृष्ठतो मां रक्षतां राजपुत्रौ।
 
 
अनुवाद
हे राजन, शिनि के पोते सात्यकि और धृष्टद्युम्न को मेरे चक्र-रक्षक बनने दो; युधामन्यु तथा उत्तमौजा, ये दो वीर राजकुमार मेरे पृष्ठ भाग की रक्षा करें॥17 1/2॥
 
O King, let Satyaki, the grandson of Shini, and Dhrishtadyumna be my chakra-guards; let Yudhamanyu and Uttamauja, these two valiant princes, protect my rear.॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)