श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.67.16-17h 
मया कर्णस्यास्त्रमिदं पुरस्ताद्
युद्धे दृष्टं पाण्डव चित्ररूपम्॥ १६॥
न ह्यन्ययोद्धा विद्यते सृञ्जयानां
महारथं योऽद्य सहेत कर्णम्।
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! मैंने युद्ध में कर्ण का यह विचित्र अस्त्र अपने सामने देखा है। सृंजयों में आज ऐसा कोई दूसरा योद्धा नहीं है जो महाबली कर्ण का सामना कर सके।
 
Son of Pandu! I have seen this strange weapon of Karna in front of me in the war. There is no other warrior among the Srinjayas who can face the mighty warrior Karna today.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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