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mahabharat 8.67.11: तत्पश्चात्, अपने सम्पूर्ण शरीर से रक्त बहाते हुए, उसने मेरे द्वारा पीड़ित समस्त सेनानायकों को रक्त से लथपथ देखा और वह सारथिपुत्र कर्ण की रथसेना में घुस गया।   |   mahabharat अध्याय 8.67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.67.11 
स विक्षरन् रुधिरं सर्वगात्रे
रथानीकं सूतसूनोर्विवेश।
मयाभिभूतान् सैनिकानां प्रबर्हा-
नसौ प्रपश्यन् रुधिरप्रदिग्धान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अपने सम्पूर्ण शरीर से रक्त बहाते हुए, उसने मेरे द्वारा पीड़ित समस्त सेनानायकों को रक्त से लथपथ देखा और वह सारथिपुत्र कर्ण की रथसेना में घुस गया।
 
Then, with blood oozing from his entire body, he saw all the chieftains of the soldiers who had been afflicted by me soaked in blood, and he entered the chariot army of Karna, the son of a charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)