श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 67: अर्जुनका युधिष्ठिरसे अबतक कर्णको न मार सकनेका कारण बताते हुए उसे मारनेके लिये प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.67.1 
संजय उवाच
तद् धर्मशीलस्य वचो निशम्य
राज्ञ: क्रुद्धस्यातिरथो महात्मा।
उवाच दुर्धर्षमदीनसत्त्वं
युधिष्ठिरं जिष्णुरनन्तवीर्य:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - राजन! धर्मात्मा राजा के उन वचनों को सुनकर क्रोध में भरकर, सनातन पराक्रमी अतिरथी महात्मा विजयशील अर्जुन ने उदार और अजेय राजा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Hearing those words of the righteous king, filled with anger, the eternally mighty Atirathi Mahatma Vijaysheel Arjuna said thus to the magnanimous and invincible King Yudhishthira. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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