Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.66.7-8: वे तेज में अग्नि के समान, बल में वायु के समान और गुरुत्वाकर्षण में पाताल के समान थे। वे अपने मित्रों के लिए आनंद के स्रोत थे और मेरे मित्रों के लिए यमराज के समान। जैसे दो देवता किसी राक्षस को हराकर लौटते हैं, वैसे ही आप दोनों मित्र महायुद्ध में कर्ण का वध करके यहाँ आए हैं, यह बड़े सौभाग्य की बात है। 7-8।   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  8.66.7-8 
अनलानिलयोस्तुल्यं तेजसा च बलेन च।
पातालमिव गम्भीरं सुहृदां नन्दिवर्धनम्॥ ७॥
अन्तकं मम मित्राणां हत्वा कर्णं महामृधे।
दिष्ट्या युवामनुप्राप्तौ जित्वासुरमिवामरौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वे तेज में अग्नि के समान, बल में वायु के समान और गुरुत्वाकर्षण में पाताल के समान थे। वे अपने मित्रों के लिए आनंद के स्रोत थे और मेरे मित्रों के लिए यमराज के समान। जैसे दो देवता किसी राक्षस को हराकर लौटते हैं, वैसे ही आप दोनों मित्र महायुद्ध में कर्ण का वध करके यहाँ आए हैं, यह बड़े सौभाग्य की बात है। 7-8।
 
He was like fire in brilliance, air in strength and underworld in gravity. He was a source of joy for his friends and like Yamaraj for my friends. Like two gods returning after defeating a demon, you two friends have come here after killing Karna in the great war, this is a matter of great fortune. 7-8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)