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mahabharat 8.66.5: वह धृतराष्ट्र के पुत्रों का रक्षक, सेना के आगे लड़ने वाला, शत्रु सैनिकों का संहार करने वाला और अपने विरोधियों को अपमानित करने में समर्थ था ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.66.5 
त्रातारं धार्तराष्ट्राणां गन्तारं वाहिनीमुखे।
हन्तारं परसैन्यानाममित्रगणमर्दनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह धृतराष्ट्र के पुत्रों का रक्षक, सेना के आगे लड़ने वाला, शत्रु सैनिकों का संहार करने वाला और अपने विरोधियों को अपमानित करने में समर्थ था ॥5॥
 
He was the protector of the sons of Dhritarashtra, the one who would fight at the front of the army, capable of killing the enemy soldiers and humiliating his opponents. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)