श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.66.48 
ब्रवीहि मे दुर्लभमेतदद्य
कथं त्वया निहत: सूतपुत्र:।
अनुध्याये त्वां सततं प्रवीर
वृत्रे हतेऽसौ भगवानिवेन्द्र:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मुझे बताओ, यह समाचार मेरे लिए अत्यंत दुर्लभ है। हे वीर! तुमने सारथीपुत्र का वध कैसे किया? मैं सदैव तुम्हारे उस विजयी रूप का स्मरण करता हूँ, जैसे वृत्रासुर के वध के बाद इंद्रदेव ने किया था। 48.
 
Tell me, this news is very rare for me. O brave one! How did you kill the son of a charioteer? I always think of your victorious form like Lord Indra after the killing of Vritraasura. 48.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरवाक्यविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)