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mahabharat 8.66.47: फाल्गुन! क्या तुम कर्ण के छल रूपी वायु से प्रेरित मेरे हृदय में उत्पन्न ईर्ष्या की अग्नि को यह कहकर बुझा दोगे कि, 'उस कर्ण को मैंने आज युद्ध में पाकर मार डाला है?'   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  8.66.47 
अमर्षजं निकृतिसमीरणेरितं
हृदि स्थितं ज्वलनमिमं सदा मम।
हतो मया सोऽद्य समेत्य कर्ण
इति ब्रुवन् प्र्रशमयसेऽद्य फाल्गुन॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
फाल्गुन! क्या तुम कर्ण के छल रूपी वायु से प्रेरित मेरे हृदय में उत्पन्न ईर्ष्या की अग्नि को यह कहकर बुझा दोगे कि, 'उस कर्ण को मैंने आज युद्ध में पाकर मार डाला है?'
 
Phalguna! Will you extinguish the fire of jealousy in my heart, inspired by the wind of Karna's deceit, saying, 'I killed that Karna today after finding him in the war'?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)