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mahabharat 8.66.45: वह दुष्टबुद्धि सारथिपुत्र कर्ण, जिसने पहले दु:शासन से हँसकर कहा था, 'तुम स्वयं जाओ और सुबलपुत्र द्वारा जीती हुई द्रुपद की कन्या को बलपूर्वक यहाँ ले आओ; क्या तुमने आज उसे मार डाला है?'   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.66.45 
य: सूतपुत्र: प्रहसन् दुरात्मा
पुराब्रवीन्निर्जितां सौबलेन।
स्वयं प्रसह्यानय याज्ञसेनी-
मपीह कच्चित् स हतस्त्वयाद्य॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
वह दुष्टबुद्धि सारथिपुत्र कर्ण, जिसने पहले दु:शासन से हँसकर कहा था, 'तुम स्वयं जाओ और सुबलपुत्र द्वारा जीती हुई द्रुपद की कन्या को बलपूर्वक यहाँ ले आओ; क्या तुमने आज उसे मार डाला है?'
 
That evil-minded charioteer's son Karna who had earlier smilingly said to Dushasan, 'Go yourself and bring here by force the daughter of Drupada who was won by the son of Subala; have you killed her today?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)