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य: सूतपुत्र: प्रहसन् दुरात्मा
पुराब्रवीन्निर्जितां सौबलेन।
स्वयं प्रसह्यानय याज्ञसेनी-
मपीह कच्चित् स हतस्त्वयाद्य॥ ४५॥
अनुवाद
वह दुष्टबुद्धि सारथिपुत्र कर्ण, जिसने पहले दु:शासन से हँसकर कहा था, 'तुम स्वयं जाओ और सुबलपुत्र द्वारा जीती हुई द्रुपद की कन्या को बलपूर्वक यहाँ ले आओ; क्या तुमने आज उसे मार डाला है?'
That evil-minded charioteer's son Karna who had earlier smilingly said to Dushasan, 'Go yourself and bring here by force the daughter of Drupada who was won by the son of Subala; have you killed her today?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥