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mahabharat 8.66.44: क्या वह क्रोधी, मूर्ख सारथी पुत्र, जिसने पहले सभा भवन में कौरवों की आँखों के सामने हमें तिल के समान नपुंसक बताया था, आज युद्धभूमि में आकर तुम्हारे द्वारा मारा गया है?   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.66.44 
यो न: पुरा षण्ढतिलानवोचत्
सभामध्ये कौरवाणां समक्षम्।
स दुर्मति: कच्चिदुपेत्य संख्ये
त्वया हत: सूतपुत्रो ह्यमर्षी॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
क्या वह क्रोधी, मूर्ख सारथी पुत्र, जिसने पहले सभा भवन में कौरवों की आँखों के सामने हमें तिल के समान नपुंसक बताया था, आज युद्धभूमि में आकर तुम्हारे द्वारा मारा गया है?
 
Has that resentful, foolish son of a charioteer who had earlier described us as impotent like empty sesame seeds in front of the Kauravas' eyes in the assembly hall, come to the battle field today and been killed by you?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)