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mahabharat 8.66.43: कर्ण का आश्रय लेकर दुर्योधन बड़े गर्व से हमारी ओर देखता था। क्या आज तुमने अपने पराक्रम से दुर्योधन के उस महान आश्रय को नष्ट कर दिया है?॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.66.43 
यद् दर्पपूर्ण: स सुयोधनोऽस्मा-
नुदीक्षते कर्णसमाश्रयेण।
कच्चित् त्वया सोऽद्य समाश्रयोऽस्य
भग्न: पराक्रम्य सुयोधनस्य॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण का आश्रय लेकर दुर्योधन बड़े गर्व से हमारी ओर देखता था। क्या आज तुमने अपने पराक्रम से दुर्योधन के उस महान आश्रय को नष्ट कर दिया है?॥ 43॥
 
Taking shelter of Karna, Duryodhan used to look at us with great pride. Have you destroyed that great shelter of Duryodhan by your might today?॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)