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mahabharat 8.66.41: हे सव्यसाची अर्जुन! क्या तुमने युद्धस्थल में गाण्डीव धनुष से छोड़े हुए प्रज्वलित बाणों द्वारा उस मंदबुद्धि कर्ण का तेजस्वी, कुंडलित मस्तक काट डाला था? 41॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.66.41 
कच्चित्त्वया तस्य सुमन्दबुद्धे-
र्गाण्डीवमुक्तैर्विशिखैर्ज्वलद्भि:।
सकुण्डलं भानुमदुत्तमाङ्गं
कायात् प्रकृत्तं युधि सव्यसाचिन्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे सव्यसाची अर्जुन! क्या तुमने युद्धस्थल में गाण्डीव धनुष से छोड़े हुए प्रज्वलित बाणों द्वारा उस मंदबुद्धि कर्ण का तेजस्वी, कुंडलित मस्तक काट डाला था? 41॥
 
Savyasachi Arjun! Did you, in the battlefield, cut off the brilliant, coiled head of that dull-witted Karna with the flaming arrows shot from the Gandiva bow? 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)