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mahabharat 8.66.39: जिस कर्ण ने आपके लिए प्रतिज्ञा की थी कि ‘मैं आज श्रीकृष्ण सहित अर्जुन को मारे बिना यहाँ से नहीं लौटूँगा’, वह पापात्मा आपके बाणों से छिन्न-भिन्न होकर भूमि पर पड़ा है?॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  8.66.39 
योऽसौ कर्ण: प्रत्यजानात्त्वदर्थे
नाहं हत्वा सह कृष्णेन पार्थम्।
इहोपयातेति स पापबुद्धि:
कच्चिच्छेते शरसम्भिन्नगात्र:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जिस कर्ण ने आपके लिए प्रतिज्ञा की थी कि ‘मैं आज श्रीकृष्ण सहित अर्जुन को मारे बिना यहाँ से नहीं लौटूँगा’, वह पापात्मा आपके बाणों से छिन्न-भिन्न होकर भूमि पर पड़ा है?॥ 39॥
 
The Karna who had vowed for you that 'I will not return from here today without killing Arjuna along with Shri Krishna', is that sinful soul lying on the ground, torn to pieces by your arrows?॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)