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mahabharat 8.66.37: इन्द्रकुमार! उस मन्दबुद्धि कर्ण ने तो सदा के लिए प्रतिज्ञा कर ली थी कि जब तक कुन्तीकुमार अर्जुन जीवित हैं, मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा। क्या तुमने आज उस कर्ण को मार डाला है?॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.66.37 
नाहं पादौ धावयिष्ये कदाचित्
यावत् स्थित: पार्थ इत्यल्पबुद्धे:।
व्रतं तस्यैतत् सर्वदा शक्रसूनो
कच्चित् त्वया निहत: सोऽद्य कर्ण:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रकुमार! उस मन्दबुद्धि कर्ण ने तो सदा के लिए प्रतिज्ञा कर ली थी कि जब तक कुन्तीकुमार अर्जुन जीवित हैं, मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा। क्या तुमने आज उस कर्ण को मार डाला है?॥ 37॥
 
Indrakumar! That dull-witted Karna had taken a vow forever that as long as Kuntikumar Arjun is alive, I will not let others wash my feet. Have you killed that Karna today?॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)