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mahabharat 8.66.36: राजाओं में कौन दुर्योधन का हर्ष बढ़ाता था और सदैव यह दावा करता था कि मैं अर्जुन को मार सकता हूँ। क्या आज उसकी बातें व्यर्थ हो गईं?॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.66.36 
योऽसौ सदा श्लाघते राजमध्ये
दुर्योधनं हर्षयन् दर्पपूर्ण:।
अहं हन्ता फाल्गुनस्येति मोहात्
कच्चिद्वचस्तस्य न वै तथा तत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजाओं में कौन दुर्योधन का हर्ष बढ़ाता था और सदैव यह दावा करता था कि मैं अर्जुन को मार सकता हूँ। क्या आज उसकी बातें व्यर्थ हो गईं?॥ 36॥
 
Who among kings used to increase Duryodhan's joy and always boasted that he can kill Arjuna. Has his talk proved futile today?॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)