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mahabharat 8.66.35: क्या वह पापी कर्ण आज युद्ध में आपके साथ युद्ध करते समय आपके धनुष से छूटे हुए और आकाश में उड़ते हुए लाल-लाल बाणों से छिन्न-भिन्न होकर पृथ्वी पर पड़ा है? क्या उसके मरते ही दुर्योधन की दोनों भुजाएँ टूट गईं थीं?॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.66.35 
कच्चित् समागम्य धनु:प्रयुक्तै-
स्त्वत्प्रेषितैर्लोहिताङ्गैर्विहङ्गै:।
शेते स पाप: सुविभिन्नगात्र:
कच्चिद् भग्नौ धार्तराष्ट्रस्य बाहू॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
क्या वह पापी कर्ण आज युद्ध में आपके साथ युद्ध करते समय आपके धनुष से छूटे हुए और आकाश में उड़ते हुए लाल-लाल बाणों से छिन्न-भिन्न होकर पृथ्वी पर पड़ा है? क्या उसके मरते ही दुर्योधन की दोनों भुजाएँ टूट गईं थीं?॥ 35॥
 
Is that sinner Karna lying on the earth today, having been torn to pieces by the red-headed arrows that flew in the sky and shot from your bow while fighting with you in the war? Did both the arms of Duryodhan get broken after his death?॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)