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mahabharat 8.66.33: हे पिता! क्या वह पापी, जो युद्धभूमि में आपका पता बताने के लिए दूसरों को हाथी-घोड़ों सहित सोने का बना सुंदर रथ देने का साहस रखता था और जो सदैव आपसे प्रतिस्पर्धा करता था, युद्धभूमि में आपके द्वारा मारा गया?   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.66.33 
रौक्मं वरं हस्तिगजाश्वयुक्तं
रथं प्रदित्सुर्य: परेभ्यस्त्वदर्थे।
सदा रणे स्पर्धते य: स पाप:
कच्चित्त्वया निहतस्तात युद्धे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! क्या वह पापी, जो युद्धभूमि में आपका पता बताने के लिए दूसरों को हाथी-घोड़ों सहित सोने का बना सुंदर रथ देने का साहस रखता था और जो सदैव आपसे प्रतिस्पर्धा करता था, युद्धभूमि में आपके द्वारा मारा गया?
 
O father, was that sinner who had the courage to give others a beautiful chariot made of gold with elephants and horses to tell your whereabouts in the battlefield and who always competed with you, killed by you on the battlefield?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)