Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.66.32: जो सदैव आपका आदर करता था, अभिमान से भरा हुआ था और आपके लिए सब ओर आक्रमण करता था, जो अपने को वीर समझता था, उस सारथीपुत्र कर्ण को क्या तुमने रणभूमि में उसके साथ युद्ध करके मार डाला है?॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.66.32 
य: सर्वत: पर्यपतत्त्वदर्थे
सदार्चितो गर्वित: सूतपुत्र:।
स शूरमानी समरे समेत्य
कच्चित्त्वया निहत: संयुगेऽसौ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो सदैव आपका आदर करता था, अभिमान से भरा हुआ था और आपके लिए सब ओर आक्रमण करता था, जो अपने को वीर समझता था, उस सारथीपुत्र कर्ण को क्या तुमने रणभूमि में उसके साथ युद्ध करके मार डाला है?॥ 32॥
 
Have you killed Karna, that son of a charioteer who always respected and was full of pride and used to attack everywhere for you, by fighting with him in the battlefield, who considered himself a valiant warrior?॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)