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mahabharat 8.66.22: मुझे पहले भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य से युद्धभूमि में ऐसा अपमान कभी नहीं सहना पड़ा था, किन्तु आज युद्ध में महारथी सूतपुत्र से मुझे वैसा ही अपमान सहना पड़ा है।   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.66.22 
न प्राप्तपूर्वं यद् भीष्मात् कृपद्रोणाच्च संयुगे।
तत् प्राप्तमद्य मे युद्धे सूतपुत्रान्महारथात्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मुझे पहले भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य से युद्धभूमि में ऐसा अपमान कभी नहीं सहना पड़ा था, किन्तु आज युद्ध में महारथी सूतपुत्र से मुझे वैसा ही अपमान सहना पड़ा है।
 
I had never faced such humiliation in the battlefield earlier from Bhishma, Drona and Kripacharya, but today I have faced the same humiliation from the great warrior Suta's son in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)