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mahabharat 8.66.21: अब मुझे इस जीवन और राज्य से क्या चाहिए, जबकि आज युद्ध में निपुण कर्ण ने मुझे इस प्रकार घायल और विकृत कर दिया है ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.66.21 
को नु मे जीवितेनार्थो राज्येनार्थो भवेत् पुन:।
ममैवं विक्षतस्याद्य कर्णेनाहवशोभिना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अब मुझे इस जीवन और राज्य से क्या चाहिए, जबकि आज युद्ध में निपुण कर्ण ने मुझे इस प्रकार घायल और विकृत कर दिया है ॥ 21॥
 
Now what do I need from this life and kingdom, when today Karna, who is adept in battle, has wounded and mutilated me in this manner. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)