Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.66.2-3: कर्ण युद्ध में विषधर सर्प के समान भयंकर, समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण और कौरवों का सेनापति था। वह समस्त शत्रु सेनाओं का हितैषी और कवच था। वृषसेन और सुषेण जैसे धनुर्धर उसकी रक्षा करते थे॥2-3॥   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  8.66.2-3 
आशीविषसमं युद्धे सर्वशस्त्रविशारदम्॥ २॥
अग्रगं धार्तराष्ट्राणां सर्वेषां शर्म वर्म च।
रक्षितं वृषसेनेन सुषेणेन च धन्विना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण युद्ध में विषधर सर्प के समान भयंकर, समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण और कौरवों का सेनापति था। वह समस्त शत्रु सेनाओं का हितैषी और कवच था। वृषसेन और सुषेण जैसे धनुर्धर उसकी रक्षा करते थे॥2-3॥
 
Karna was as fierce as a poisonous snake in battle, was adept in all the weapons and was the leader of the Kauravas. He was the well-wisher and shield of all the enemy forces. Archers like Vrishasena and Sushen protected him.॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)