श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.66.17 
तस्यायमगमत् कालश्चिन्तयानस्य मे चिरम्।
कथं कर्णो मया शक्यो युद्धे क्षपयितुुं भवेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में कर्ण को कैसे मारूँ, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने बहुत समय बिताया है ॥17॥
 
I have spent this long time thinking about how I can kill Karna in the war. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)