श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.66.15 
त्रयोदशाहं वर्षाणि यस्माद् भीतो धनंजय।
न स्म निद्रां लभे रात्रौ न चाहनि सुखं क्वचित्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन! जिनके कारण मैं इतना भयभीत था कि तेरह वर्षों तक न तो रात को अच्छी तरह सो सका और न ही दिन में सुख पा सका। 15.
 
Arjun! Because of whom I was so afraid that I could neither sleep well at night nor find happiness during the day for thirteen years. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)