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mahabharat 8.66.1-2h: युधिष्ठिर बोले, "देवकीनन्दन! आपका स्वागत है। धनंजय! आपका भी स्वागत है। श्रीकृष्ण और अर्जुन! इस समय आप दोनों को देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है; क्योंकि आप दोनों ने सुरक्षित रहते हुए तथा बिना किसी हानि के महाबली कर्ण का वध कर दिया है।"   |   mahabharat अध्याय 8.66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 66: युधिष्ठिरका अर्जुनसे भ्रमवश कर्णके मारे जानेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 1-2h
 
 
श्लोक  8.66.1-2h 
युधिष्ठिर उवाच
स्वागतं देवकीमात: स्वागतं ते धनंजय।
प्रियं मे दर्शनं गाढं युवयोरच्युतार्जुनौ॥ १॥
अक्षताभ्यामरिष्टाभ्यां हत: कर्णो महारथ:।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "देवकीनन्दन! आपका स्वागत है। धनंजय! आपका भी स्वागत है। श्रीकृष्ण और अर्जुन! इस समय आप दोनों को देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है; क्योंकि आप दोनों ने सुरक्षित रहते हुए तथा बिना किसी हानि के महाबली कर्ण का वध कर दिया है।"
 
Yudhishthira said, "Devakinandan! You are welcome. Dhananjay! You are also welcome. Shri Krishna and Arjun! I am very pleased to see you both at this time; because both of you have killed the mighty warrior Karna while remaining safe and without suffering any harm to yourselves." 1 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)