भीमसेन उवाच
अपयात इतो राजा धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
कर्णबाणाभितप्ताङ्गो यदि जीवेत् कथञ्चन॥ ४॥
अनुवाद
भीमसेन बोले - धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर यहाँ से चले गए हैं। कर्ण के बाणों से उनके शरीर के सभी अंग पीड़ित हो रहे हैं। सम्भव है कि वे किसी प्रकार जीवित हों ॥4॥
Bhimasena said - Dharmaputra King Yudhishthira has moved away from here. All his body parts are being tormented by Karna's arrows. It is possible that he is somehow alive. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥