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mahabharat 8.65.16-17: राजेन्द्र! शत्रु वृकोधर भीमसेन को शत्रुओं के सामने खड़ा करके और उन्हें युद्ध का पूर्वोक्त संदेश देकर वे दोनों पुरुष रथ से उतरकर अकेले ही सोये हुए राजा युधिष्ठिर के पास गए और धर्मराज के चरणों में प्रणाम किया॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 8.65: भीमसेनको युद्धका भार सौंपकर श्रीकृष्ण और अर्जुनका युधिष्ठिरके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 65: भीमसेनको युद्धका भार सौंपकर श्रीकृष्ण और अर्जुनका युधिष्ठिरके पास जाना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  8.65.16-17 
प्रत्यनीके व्यवस्थाप्य भीमसेनमरिंदमम्।
संदिश्य चैतं राजेन्द्र युद्धं प्रति वृकोदरम्॥ १६॥
ततस्तु गत्वा पुरुषप्रवीरौ
राजानमासाद्य शयानमेकम्।
रथादुभौ प्रत्यवरुह्य तस्माद्
ववन्दतुर्धर्मराजस्य पादौ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! शत्रु वृकोधर भीमसेन को शत्रुओं के सामने खड़ा करके और उन्हें युद्ध का पूर्वोक्त संदेश देकर वे दोनों पुरुष रथ से उतरकर अकेले ही सोये हुए राजा युधिष्ठिर के पास गए और धर्मराज के चरणों में प्रणाम किया॥16-17॥
 
Rajendra! After setting up the enemy Vrikodhar Bhimsen to face the enemies and giving him the aforesaid message about the war, both the men went down from the chariot to the sleeping King Yudhishthir alone and paid obeisance at the feet of Dharmaraja. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)