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श्लोक 8.64.66  |
कर्णेन हि दृढं राजा कुन्तीपुत्र: परिक्षित:।
तं दृष्ट्वाऽऽश्वास्य च पुन: कर्णं पार्थ वधिष्यसि॥ ६६॥ |
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| अनुवाद |
| पार्थ! कर्ण ने राजा युधिष्ठिर को बहुत बुरी तरह घायल कर दिया है। उनसे मिलो, उन्हें सांत्वना दो और फिर कर्ण का वध कर दो।' |
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| Partha! Karna has injured King Yudhishthira very badly. Meet him and console him and then kill Karna.' |
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