श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  8.64.65 
एवमुक्तस्तु पार्थेन कृष्णो मतिमतां वरम्।
धनंजयमुवाचेदं प्राप्तकालमरिंदमम्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के ऐसा कहने पर बुद्धिमानों में शत्रुनाशक श्री कृष्ण ने अर्जुन से यह समयानुकूल बात कही- 65॥
 
When Arjuna said this, Shri Krishna said this timely thing to Arjuna, the enemy destroyer among the wisest of all – 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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