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mahabharat 8.64.63: वह निरन्तर घोड़ों को हाँक रहा है और बार-बार मेरी ओर देख रहा है। मैं युद्धभूमि में कर्ण से भागना उचित नहीं समझता।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.64.63 
अभीक्ष्णं चोदयन्नश्वान् प्रेक्षते मां मुहुर्मुहु:।
न च पश्यामि समरे कर्णं प्रति पलायितुम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वह निरन्तर घोड़ों को हाँक रहा है और बार-बार मेरी ओर देख रहा है। मैं युद्धभूमि में कर्ण से भागना उचित नहीं समझता।
 
He is constantly driving the horses and repeatedly looking at me. I do not consider it appropriate to flee from Karna in the battlefield. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)