श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.64.61 
पश्य कृष्ण महाबाहो भार्गवास्त्रस्य विक्रमम्।
नैतदस्त्रं हि समरे शक्यं हन्तुं कथञ्चन॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु श्रीकृष्ण! इस भार्गवस्त्र का पराक्रम देखो। यह अस्त्र युद्धभूमि में किसी भी प्रकार नष्ट नहीं हो सकता।
 
Mahabahu Sri Krishna! See the might of this Bhaargavastra. This weapon cannot be destroyed in any way in the battlefield. 61.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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