श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  8.64.57 
वध्यमानांस्तु तान् दृष्ट्वा सूतपुत्रेण मारिष।
वित्रेसु: सर्वभूतानि तिर्यग्योनिगतान्यपि॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
आर्य! सूतपुत्र के द्वारा उन योद्धाओं को मारा जाता देख, समस्त पशु-पक्षी भय से काँप उठे॥57॥
 
Arya! Seeing those warriors being killed by Sutaputra, all the animals and birds trembled with fear. 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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