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mahabharat 8.64.55-56: हे सिंहपुरुषों! वे महारथी व्याघ्रों के समान गर्जना कर रहे थे। हे राजन! युद्ध के मुहाने पर भयभीत होकर चिल्लाते हुए सब दिशाओं में भागते हुए उन सैनिकों का महान आर्तनाद प्रलयकाल में समस्त प्राणियों के आर्तनाद के समान प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  8.64.55-56 
चुक्रुशुश्च नरव्याघ्र यथा व्याघ्रा नरोत्तमा:।
तेषां तु क्रोशतामासीद् भीतानां रणमूर्धनि॥ ५५॥
धावतां च ततो राजंस्त्रस्तानां च समन्तत:।
आर्तनादो महांस्तत्र भूतानामिव सम्प्लवे॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे सिंहपुरुषों! वे महारथी व्याघ्रों के समान गर्जना कर रहे थे। हे राजन! युद्ध के मुहाने पर भयभीत होकर चिल्लाते हुए सब दिशाओं में भागते हुए उन सैनिकों का महान आर्तनाद प्रलयकाल में समस्त प्राणियों के आर्तनाद के समान प्रतीत हो रहा था।
 
O lion men! Those great warriors howled like tigers. O King! The great cry of those soldiers, who were terrified and screaming at the mouth of the battle and were running in all directions, seemed like the cry of all living beings during the time of destruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)