श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  8.64.51-52 
निपतद्भिर्गजै राजन्नश्वैश्चापि सहस्रश:।
रथैश्चापि नरव्याघ्र नरैश्चैवसमन्तत:॥ ५१॥
प्राकम्पत मही राजन् निहतैस्तै: समन्तत:।
व्याकुलं सर्वमभवत् पाण्डवानां महद् बलम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हाथियों, हजारों घोड़ों, रथों और मृत पैदल सैनिकों के गिरने से सारी पृथ्वी चारों ओर से काँपने लगी। पाण्डवों की समस्त विशाल सेना व्याकुल हो उठी।
 
King! The entire earth started trembling on all sides due to the falling of elephants, thousands of horses, chariots and dead foot soldiers. The entire huge army of the Pandavas became restless.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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