श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  8.64.50 
हाहाकारो महानासीत् पञ्चालानां विशाम्पते।
पीडितानां बलवता भार्गवास्त्रेण संयुगे॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! युद्धस्थल में शक्तिशाली भार्गवस्त्र से पीड़ित पांचालों का महान् हाहाकार सर्वत्र गूंजने लगा।
 
Prajanath! The great hue and cry of the Panchalas who were suffering from the powerful Bhargavastra in the battle-field began to resonate everywhere.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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