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mahabharat 8.64.5: तब अर्जुन ने हँसकर दिव्यास्त्र निकाला; किन्तु ब्राह्मण अश्वत्थामा ने युद्धस्थल में ही उसके दिव्यास्त्र को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.64.5 
अर्जुनस्तु ततो दिव्यमस्त्रं चक्रे हसन्निव।
तदस्त्रं वारयामास ब्राह्मणो युधि भारत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने हँसकर दिव्यास्त्र निकाला; किन्तु ब्राह्मण अश्वत्थामा ने युद्धस्थल में ही उसके दिव्यास्त्र को रोक दिया।
 
Bhaarat! Then Arjun smilingly produced a divine weapon; but the Brahmin Ashvatthama warded off his divine weapon on the battlefield. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)