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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  8.64.49 
ज्वलितैस्तै: शरैर्घोरै: कङ्कबर्हिणवाजितै:।
संछन्ना पाण्डवी सेना न प्राज्ञायत किञ्चन॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
कंक और मयूर के समान पंख वाले उन भयंकर एवं प्रज्वलित बाणों से पाण्डव सेना घिर गई। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। 49।
 
The Pandava army was surrounded by those fierce and blazing arrows with feathered feathers like Kank and Peacock. Nothing could be seen. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)